February 24, 2026

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भाजपा का 2024 का संकल्प पत्र सिर्फ और सिर्फ एक जुमला पत्र, छल पत्र और झूठ का पुलिंदा

ना महंगाई, ना बेरोजगारी, एमएसपी गारंटी और ना महिला न्याय पर कोई बात : आम जनता को फिर से एक बार ठगने की तैयारी

       रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय गंगवानी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 2024 के 76 पेज के संकल्प पत्र में ना देश में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण की कोई बात कही गयी, ना ही 45 साल के रिकॉर्ड तोड़ विकराल बेरोजगारी से निपटने की कोई बात की और ना ही सड़कों में आंदोलन कर रहे अन्नदाता किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी की बात और ना ही किसानों के कर्जमाफी की बात की गयी और ना ही देश की 50 प्रतिशत आबादी महिला के हितों की कोई बात कही गयी और ना ही शोषित और वंचित वर्ग को उनके अधिकार देने की बात कही गयी है।

       अजय गंगवानी ने कहा कि 30 मार्च को भारतीय जनता पार्टी की घोषणा पत्र समिति का गठन किया गया और मात्र 13 दिनों में आनन-फानन में मेनिफेस्टो घोषित कर दिया गया। भाजपा के इस पूरे संकल्प पत्र में आम जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं। भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र का पिटारा पूरी तरह खाली है, जबकि कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा और भारत न्याय यात्रा के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों, हर समुदाय और हर वर्ग से चर्चा के बाद उनकी समस्याओं, जरूरतों और उनकी मांगों के अनुसार कांग्रेस का न्याय पत्र बनाया गया, जिसमें किसान, युवा, महिला, श्रमिक, एवं शोषण व वंचित वर्ग के हितों और न्याय का पूरा ध्यान रखा गया है।

       भाजपा का यह मोदी गारंटी पत्र सिर्फ और सिर्फ “छलपत्र“ झूठ का पुलिंदा और जुमलेबाजी से बढ़कर कुछ नहीं। पहले भी दो बार भारतीय जनता पार्टी ने 2014 और 2019 में अपने घोषणा पत्र के नाम पर बड़े-बड़े वादे और दावे किये, परन्तु 75 प्रतिशत से भी ज्यादा वादों को केंद्र की मोदी सरकार इन 10 सालों में पूरा नहीं कर पायी।लगातार वादाखिलाफी और जुमलेबाजी करके देश के किसान, युवा, महिलाओं, आदिवासियों को ठगने का काम भाजपा ने किया। केंद्र की मोदी सरकार को संकल्प पत्र के बजाय माफी पत्र घोषित करके देश की आम जनता से अपनी वादाखिलाफी के लिए माफी मांगनी चाहिए।


       भाजपा ने अपनी घोषणा पत्र में गिरते हुए करेंसी की कीमत को सुधारने की बात कही थी और और डॉलर के मुकाबले रुपए 83 के पार पहुंच चुका है, और यही मोदी जी जब विपक्ष में थे तो रुपए के गिरते मूल्य की तुलना केंद्र की भ्रष्ट सरकार से करते रहे।

       किसानों की आए तो 2022 तक दोगुनी नहीं हुई। बल्कि NSO के आंकड़ों के अनुसार किसानों की आय मात्र 27 रुपए प्रतिदिन हो चुकी है। हां किसानों पर इन 10 सालों में ऋण दुगना हो चुका है। 2014 में औसत रूप से प्रत्येक किसान पर 47000 ऋण था जो वर्तमान में बढ़कर 74000 हो चुका है, भारत में औसत रूप से प्रति घंटे दो किसान आत्महत्या कर रहे हैं। 2019 में 12 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दी जा रही थी, वर्तमान में मात्र 4 करोड़ किसानों को दी जा रही है। मतलब सीधा 67 प्रतिशत किसानों का नाम काट दिया गया।

       काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, 2047 तक विकसित भारत का दावा और जुमलेबाजी करके देश की आम जनता को फिर से ठगने वाली केंद्र की मोदी सरकार को आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव में 4 जून को देश की आम जनता पूरी तरह विदा करके संविधान और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में अपनी अहम् भूमिका निभायेगी।