February 24, 2026

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मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण रुपये की कीमत 25 रू घटी : कांग्रेस

रूपये की कीमत गिरने से महंगाई बढ़ गयी है

 

       रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी तब एक डॉलर का मूल्य 59 रुपए था। आज बीजेपी ने इसे 59 रुपए से बढ़ाकर 84 रुपए पहुंचा दिया है। रुपए के कमज़ोर होने का सीधा असर आम आदमी का जेब पर पड़ता हैः  रुपए की क़ीमत से तय होता है कि हमें विदेश से आयात होने वाले सामान किस क़ीमत पर मिलेंगे। 2014 में अगर कोई सामान विदेश से 1 डॉलर का आता था तो 59 रुपए चुकाने पड़ते थे। आज हमें उसी 1 डॉलर मूल्य की वस्तु के लिए 84 रुपए चुकाने होंगे। हमें जो अतिरिक्त 25 रुपया देना पड़ा रहा है, वह रुपए की गिरती क़ीमत के कारण है। जब विदेशों से आयात होने वाले सामान देश में अधिक क़ीमत पर आएंगे तो ज़ाहिर सी बात है कि लोगों को भी वे ज़्यादा ही दाम पर मिलेंगे।

       दीपक बैज ने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का 80 डालर प्रति बेरल आयात करता है। इसमें से अधिकांश का भुगतान डॉलर में करना होता है। रुपए के कमज़ोर होने के कारण भारत अब अधिक कीमत पर ईंधन ख़रीद रहा है। जब भी आप पेट्रोल पंप पर जाते हैं तो रुपए के कमज़ोर होने का असर आम आदमी को उठाना पड़ता है। जब ईंधन महंगा हो जाता है तो हर तरह के समान की ढुलाई लागत बढ़ जाती है। इसलिए खाने-पीने समेत सभी प्रकार की वस्तुएं महंगी होती जा रही हैं। जब आप किराने का सामान खरीदने बाज़ार जाते हैं तो रुपए के कमज़ोर होने के कारण आपको ज़्यादा क़ीमत चुकानी पड़ती है।

       जब महंगाई बढ़ेगी, तो आरबीआई ऊंची कीमतों पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरें भी बढ़ाएगा। इससे लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी। यदि कोई होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लिया है तो उसकों बैंक को अधिक ब्याज देने को मजबूरी होंगी – यह सब रुपए के कमज़ोर होने के कारण है।

       2014 से पहले रुपए के मूल्य में अपेक्षाकृत कम गिरावट होने पर भी बीजेपी के नेता बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे। याद है, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रुपए की क़ीमत और डॉ. मनमोहन सिंह की उम्र को जोड़ते हुए कितनी घटिया बातें कही थी? रुपए का मूल्य काफ़ी पहले ही उनकी अपनी उम्र से नीचे गिर गया है।