February 24, 2026

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प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों को तत्काल हटाने की हुई मांग

       दुर्ग। सरकार बदलते ही प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही की उम्मीद आम जनता को रहती है, लेकिन जब सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे की तर्ज पर काम करने लगे तो फिर किसी भी सरकार से कुछ उम्मीद रखना बेईमानी हो जाता है।

       कांग्रेस की सरकार ने शिक्षा विभाग में वरिष्ठ पदों पर वरिष्ठों के रहते कनिष्ठों को चालू प्रभार सौंप दिया था, जिसको लेकर बीजेपी लगातार हो हंगामा करती रही, नियम कानून का हवाला देती रही और जब उनकी सरकार आई तो 33 जिलों में 30 जिलों में प्रभारीयों को जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया। ठीक आचार संहित लागू होने के तीन दिन पूर्व 13 मार्च को जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना के संबंध में आदेश जारी किया गया, लेकिन 26 जिलों में वरिष्ठ पदों पर वरिष्ठों के रहते कनिष्ठों को जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया, जिसको लेकर विभाग में ही भारी नाराजगी देखी गई। मामला कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने डीईओं पदस्थापना आदेश में दिनांक 22 मार्च को ही स्थगन आदेश दे दिया था, चुंकि आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण उस आदेश का परिपालन नहीं हो पाया था, लेकिन अब जब आचार संहिता समाप्त हो चुका है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी न्यायालय के आदेश को पालन कराने में हिला-हवाला कर रहे है और प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी आज भी अपने पदों पर जमें हुए है, जिसको लेकर अब छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने शिक्षा विभाग के प्रमुख कोमल परदेशी को पत्र लिखकर 13 मार्च को जारी डीईओ पदस्थापना आदेश निरस्त करने की मांग किया गया है।

       श्री पॉल का कहना है कि अवर सचिव, आरपी वर्मा ने वरिष्ठता सूची भर्ती पदोन्नति नियम और सामान्य प्रशासन के स्थायी आदेश को बाईपास कर वरिष्ठ पदों पर वरिष्ठों के रहते कनिष्ठों को चालू प्रभार सौंपा दिया था, जो उचित नहीं है, इसलिए डीईओ पदस्थापना आदेश 13 मार्च को निरस्त करने की मांग की गई है।